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खाँसी

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पेट दर्द(Abdominal Pain)

परिचय और प्रकार

हमारे पेट वाले भाग मे कई तरह के अंग पाये जाते हें। जैसे, लीवर, गुर्दे, अग्नयाशय, अमाशय, प्रजनन अंग, आँते, मूत्राशय इत्यादि। इन अंगो मे सूजन, संक्रमण और चोट के चलते पेट दर्द होता हे। पेट दर्द कई अन्य कारणों से भी होता हे। इसके अतिरिक्त शरीर के अन्य हिस्सों में हुई समस्याओं की वजह से भी पेट दर्द हो सकता है, जैसे छाती, पेडु, कमर, दिल आदि की समस्याएं।

पेट का दर्द निम्न चार प्रकार का हो सकता है-

सामान्य पेट दर्द(Generalized Pain)– यह दर्द पेट के आधे से भी ज्यादा इस समय महसूस दे सकता है। यह पेट में होने वाले संक्रमण (बैक्टीरिया, वायरस या अन्य संक्रमण), बदहजमी या गैस की वजह से हो सकता है।

स्थानीय दर्द(Localised Pain)– यह पेट के एक विशेष हिस्से में महसूस देता है। यह पेट में मौजूद अंग जैसे अपेंडिक्स, पित्ताशय, मूत्राशय, अग्न्याशय इत्यादि अंगों में हुई गड़बड़ी की वजह से होता है। यह दर्द हर्निया में भी हो सकता है।

ऐंठन के साथ पेट दर्द(Cramping Pain)- यह दर्द काफी आम है तथा आता-जाता रहता है। इसकी तीव्रता भी बदलती रहती है और एक जगह से दूसरी जगह भी जा सकता है। यह आमतौर पर गंभीर नहीं होता। यह गैस मल त्याग या औरतों में पीरियड्स के दौरान हो सकता है।

कोलिकी पेन(Colicky Pain)- यह दर्द भी cramping pain की तरह आता- जाता रहता है, पर यह अधिक गंभीर होता है और अचानक शुरू होता है रुक जाता है। यह सामान्य तौर पर गुर्दे की पथरी पित्ताशय की पथरी की वजह से होता है।

लक्षण एवं संकेत

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ठंड लगना( Chills)

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हर्पीस(Herpes)

परिचय और प्रकार

यह एक प्रकार के वायरस से होने वाला रोग हे। ये वही वायरस होता हे जिससे चिकनपॉक्स होता है। इस वायरस का  नाम varicella-zoster virus (VZV) होता है। चिकनपॉक्स ठीक होने पर ये वायरस बॉडी के अंदर छुप कर बैठ जाता है, और आगे चलकर बुढापे मे या इम्यूनिटी कम होने की वजह से ये दुबारा सक्रिय हो जाता हे और हर्पीस नामक रोग पैदा करता है।

हर्पीस एक तरह का संक्रमित रोग होता हे जो कि छूने से भी फैल सकता है। आपके घर मे किसी को भी ये रोग होने पर अत्यन्त सावघानी बरतने की आवशयकता होती हे। यह रोग जीवन मे कई बार हो सकता है लेकिन इसके लछणों की इन्टेन्सिटी हर बार कम होती जाती हे, क्योंकि हमारा शरीर इसके विरुद्ध रोग प्रतिरोधकता विकसित कर लेता हे।

हर्पीस दो तरह का होता हे-

  1. हर्पीस सिम्पलैक्स–  हर्पीस सिम्पलैक्स की खास बात ये हे कि ये यौन संक्रमित रोग होता हे। मतलब की ये असुरछित यौन सम्बन्ध बनाने से फैल सकता है। ये रोग चेहरे पर और जननांगो पर होता हे । इसको भी दो भागों मे विभाजित किया गया हे-

• HSV1(एचएसवी१)– इसका संक्रमण चेहरे, होंठो और मुह के अन्दर होता है। ये जननांगो पर भी हो सकता हे। आपने देखा होगा कि बहुत से लोगों की बाँछ पक जाती हे। ये HSV1 की वजह से ही होता हेा

HSV2(एचएसवी२)- इसका संक्रमण केवल जननांगो मे होता हे। इसलिये इसे जेनाइटल हर्पीस भी कहा जाता हे। इसका कोई स्थायी इलाज नही होता हे। ये आपको जीवन भर भी परेशान कर सकता हे।

2.हर्पीस जोस्टर–  ये यौन संक्रमित नही होता हे। ये अधिकतर पीठ, चेहरे, और कन्धे पर होता हे। इसमे त्वचा पर फफोले से पड जाते हें और उनमे पानी सा भी भर जाता हे। इनमे खुजली आती हे और अत्याघिक पीडा भी होती हे। 

लक्षण और संकेत

हर्पीस सिम्पलैक्स के लक्षण–  फफोले और उनमें दर्द, कोल्ड सोर्स, संक्रमण की जगह पर खुजली, झनझनाहट और जलन का अनुभव, बुखार और बदन दर्द भी हो सकता है, लिंफ नोड्स में सूजन इत्यादि।

हर्पीस जोस्टर के लक्षण– फफोले और उनमें दर्द, संक्रमण की जगह पर खुजली, झनझनाहट, और जलन का अनुभव, लिंफ नोड्स में सूजन, बुखार, सिर दर्द, ठंड लगना, बदन दर्द, पेट का खराब होना इत्यादि।

डायग्नोसिस

हर्पीस सिंपलेक्स (Herpies Simplex) का डायग्नोसिस– हर्पीस सिंपलेक्स दो तरह का होता है, HSV1  और HSV2, तथा इसका डायग्नोसिस भी इसी आधार पर किया जाता है-

मेडिकल इतिहास (Medical History)-

HSV1(एचएसवी१)- इसकी मेडिकल हिस्ट्री में निम्न तथ्यों पर ध्यान दिया जाता है-

1. संक्रमण की जगह पर दर्द जलन और खुजली का होना। यह लक्षण फफोले पड़ने से पहले भी महसूस दे सकते हैं।

2. मुंह के छाले- इनका इनक्यूबेशन पीरियड 2 दिन से 2 सप्ताह (औसतन 4 दिन) तक हो सकता है, तथा इनकी अवधि 2 से 3 हफ्ते तक होती है। यह होठों, मसूड़ों, गला, जीभ के सामने के हिस्से, अंदरूनी गालों तथा मुंह के अंदर के ऊपरी हिस्से पर हो सकते हैं। इनका आकार 1 से 3 mm के लगभग होता है।

इनकी शुरूआत फफोलों से होती है जो की बाद में छालों का रूप ले लेते हैं। इनमें दर्द होता है, और मरीज को खाने-पीने में भी दिक्कत आ सकती है।

3. बुखार भी आ सकता है।

4. बदन दर्द।

5. थकावट का महसूस देना।

6. गर्दन में सूजन और दर्द भी हो सकता है।

7. गले में दर्द तथा टॉन्सिल्स पर हल्के छालों का होना।

HSV2(एचएसवी२)- मेडिकल हिस्ट्री मैं निम्न बातों का ध्यान दिया जाता है-

1. जननांगों पर फफोले या छाले- यह किसी संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के संपर्क में आने के 1 हफ्ते के भीतर हो सकते हैं, तथा इनकी अवधि 2 से 4 हफ्ते की होती है। जननांगों (योनि तथा लिंग) तथा गुदा पर होते हैं। इनका आकार 1 से 3 mm तक होता है।

फफोले या छाले समूह में उत्पन्न होते हैं, और इनमें दर्द हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है।

2. बुखार भी हो सकता है।

3. बदन दर्द।

4. सिर दर्द।

5. योनि स्राव

6. पेशाब करते समय दर्द या जलन का अनुभव होना।

शारीरिक परीक्षण (Physical Examination)-

हर्पीस सिंपलेक्स के फिजिकल एग्जामिनेशन में निम्न चीजें दिखाई देती हैं-

1. फफोले या छाले- HSV1 मे ये सामान्यतः होठों, मसूड़ों, गले में, जीभ के सामने की सतह पर, और मुंह के अंदर की ऊपरी सतह पर।

HSV2 मैं ये जननांगों पर दिखाई देते हैं।

2. लिंफ नोड्स में सूजन- सर्वाइकल तथा इंगुइनल लसीका ग्रंथियों पर सूजन।

खून की जांच तथा अन्य जांचें- हर्पीस सिंपलेक्स में निम्न प्रकार की जांचें कराई जाती हैं-

1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)- डायरेक्ट टेस्ट्स मे छालों या फफोलों या जननांगों के स्राव से नमूना लेकर हर्पीस सिंपलेक्स वायरस की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। सैंपल को वैस्कुलर घाव से 24 घंटे के भीतर लिया जाता है, क्योंकि बाद में इस पर पपड़ी जमने लगती है, जिससे टेस्ट के परिणाम पूर्णतया सही नहीं होते हैं।

2. संवर्धन (Culture)-

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